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ट्रैफिक चौकी की नाक के नीचे दौड़ रही 15 साल पुरानी बस!*

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, *शासन के आदेश के बाद भी खुले आम सड़क पर आखिर किसकी अनदेखी से चल रही बस?*                                                                                                                      ✍️ *चंद्रकांतभोसले*                                                                                                                        ,देवास। शहर में यातायात नियमों की निगरानी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 15 वर्ष से अधिक पुरानी बस के कथित रूप से  शासन के नियमों के विपरीत संचालन को लेकर शिकायत सामने आने के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा अब तक कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस बस के संबंध में शिकायत अधिकारियों तक पहुंच चुकी है, वह आखिर ट्रैफिक चौकी की नाक के नीचे से होकर खुलेआम सड़क पर कैसे दौड़ रही है? मुस्तकीम नागौरी ने इस मामले में कलेक्टर को शिकायत देकर बस की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में बताया गया कि बस स्टैंड से चौहान ट्रैवल्स बस क्रमांक एम-41-पी-0725 देवास से बरोठा के लिए संचालित की जा रही है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बस 15 वर्ष से अधिक पुरानी है और इसके बावजूद उसका संचालन किया जा रहा है। नागौरी के अनुसार, जो बस बरोठा देवास सवारी ढों रही है उस बस का परमिट शादी ब्याह के लिए है जो शासन के नियम के विपरीत चल रही है। जबकि परिवहन विभाग ने 15 साल पुरानी बस मालिकों को नोटिस भी जारी कर दिए हैं बावजूद उक्त बस सड़क पर संचालित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में उनके द्वारा यातायात थाना प्रभारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तथा परिवहन अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को शिकायत की गई, लेकिन शिकायत के बाद भी अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। मामले में सबसे बड़ा सवाल विभागीय निगरानी को लेकर है। यदि किसी वाहन के संबंध में लिखित शिकायत संबंधित अधिकारियों तक पहुंच चुकी है, तो उसकी उम्र, परमिट, और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच अब तक क्यों नहीं की गई? यदि जांच की गई है तो उसका परिणाम सार्वजनिक क्यों नहीं हुआ? और यदि जांच नहीं हुई तो शिकायत को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया? खास बात यह है कि शिकायतकर्ता के अनुसार बस शहर के ऐसे मार्ग से गुजरती है जहां ट्रैफिक चौकी मौजूद है ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि विभाग की नजर के सामने से गुजर रहे वाहन की उम्र और दस्तावेजों की जांच आखिर कौन करेगा? मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर यातायात नियमों के पालन और सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार कार्रवाई की जाती है, वहीं दूसरी ओर शिकायत के बावजूद कथित रूप से पुरानी बस का संचालन जारी रहने की बात सामने आ रही है। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि बस वास्तव में निर्धारित नियमों के विपरीत संचालित हो रही है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या संबंधित अधिकारियों को बस के संचालन की जानकारी नहीं है या फिर शिकायत के बावजूद मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है?

*दुर्घटना हुई तो जिम्मेदारी किसकी?*

नागौरी ने आशंका जताई है कि यदि उक्त बस से कोई दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। उनका कहना है कि दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय उससे पहले ही वाहनों के दस्तावेज और परमिट की जांच होना जरूरी है। अब कलेक्टर को दी गई शिकायत के बाद निगाह प्रशासन पर है कि वह बस क्रमांक एम-41-पी-0725 की वास्तविक उम्र, परमिट,और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच करवाता है या नहीं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित वाहन के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल मामला यह सवाल जरूर छोड़ रहा है कि ट्रैफिक चौकी की नाक के नीचे से कथित रूप से नियमों के विपरीत चल रही बस विभागीय निगरानी से कैसे बच रही है और शिकायत के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

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